!doctype html> मोहनी मुरति साँवरी सूरति: भजन (Mohini Murat Sanwali Surat, Aai Basau In Nainan Me) Lyrics — Vrinda Ke Geet
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Krishna भजन

मोहनी मुरति साँवरी सूरति: भजन

Mohini Murat Sanwali Surat, Aai Basau In Nainan Me

Published: 21 जून 2026

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हिंदी

मोहनी मुरति साँवरी सूरति,

आइ बसौ इन नैनन में ।

अति सुन्दर रूप अनूप लिये,

नित खेलत खात फिरौ वन में ॥

निशि वासर पान करूँ उसका,

रसधार जो बाँसुरी की धुन में ।

बैकुन्ठ से धाम की चाह नहीं,

बस बास करूँ वृन्दावन में ॥पीठ से पीठ लगाइ खड़े,

वह बाँसुरी मन्द बजा रहे हैं ।

अहोभाग्य कहूँ उस धेनु के क्या,

खुद श्याम जिसे सहला रहे हैँ ॥

बछड़ा यदि कूद के दूर गयौ,

पुचकार उसे बहला रहे हैं ॥

गोविंद वही, गोविंद वही,

गोपाल वही कहला रहे हैं ॥

नाम पुकारि बुलाई गयी,

तजि भूख और प्यास भजी चली आयी ।

कजरी, बजरी, धूमरि, धौरी,

निज नामन से वो रहीं हैं जनायी ॥

धूप गयी और साँझ भयी तब,

बाँसुरी मन्द दयी है बजायी ।

घनश्याम के पीछे ही पीछे चलें,

वह धेनु रहीं हैं महा सुख पायी ॥

बैकुन्ठ नहीं, ब्रह्मलोक नहीं,

नहीं चाह करूँ देवलोकन की ।

राज और पाठ की चाह नहीं,

नहीं ऊँचे से कुन्ज झरोकन की ॥

चाह करूँ बस गोकुल की,

यशोदा और नंद के दर्शन की ।

जिनके अँगना नित खेलत हैं,

उन श्याम शलौने से मोहन की ॥

गोविंद हरे गोपाल हरे,

जय जय प्रभु दीनदयाल हरे ।

इस मन्त्र का जो नित जाप करे,

भव सिंन्धु से पार वो शीघ्र तरे ॥

वह भक्ती विकास करे नित ही,

और पाप कटें उसके सगरे ।

घनश्याम के ध्यान में मस्त रहे,

उर में सुख शाँति निवास करे ॥

Transliteration

Mohini Murat Sanwali Surat, Aai Basau In Nainan Me

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Category
krishna
Type
bhajan
Published
21 जून 2026
Tags
krishna bhajan

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