आरती बाबा भूतनाथ संकर भगवान की
aarati baba bhutnaath sankar bhagwan ki
आरती बाबा भूतनाथ संकर भगवान की — a beautiful devotional aarti lyrics page.
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tumhari chahat mein ho ke pagal, gali gali mein bhatak rahi hoo
तुम्हारी चाहत में हो के पागल, गली गली में भटक रही हूँ — a beautiful devotional bhajan lyrics page.
Published: 21 जून 2026
तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,
कहा मिलोगे तुम मुझको मोहन ,
हर एक जगह पे ढूंढ रही हूँ ,
पता बता दो तो मिलने आऊ ,
हाल ये दिल का तुम्हे सुनाऊ ,
ना बढ़ाओ मुझसे यूं दुरी मोहन ,
हाथ जोड़कर ये कह रही हूँ ,
तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,
क्या मैं करू जो तुम मान जाओ ,
पास में अपने मुझे बुलाओ ,
कोई तो राह बता दो मोहन ,
हाथ जोड़कर में पूछ रही हूँ ,
तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,
क्या कुछ तुमसे छुपा हैं मोहन ,
तेरे भरोसे हैं मेरा जीवन ,
जनम जनम से हूँ मैं तो प्यासी ,
जनम जनम से हूँ तेरी दासी ,
दरश को तेरे तरस रही हूँ ,
तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,
Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
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