!doctype html> सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी (Sita Ram Daras Ras Barse Lyrics | Ravindra Jain's Ram Bhajans) Lyrics — Vrinda Ke Geet
Sita Ram Daras Ras Barse Lyrics | Ravindra Jain's Ram Bhajans — सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी devotional song
Ram भजन

सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी

Sita Ram Daras Ras Barse Lyrics | Ravindra Jain's Ram Bhajans

Published: 21 जून 2026

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चहु दिस बरसे राम रस छायो हर्ष अपार राम जानकी की करे सब मिल जय जय कार कौशल्या नंदन राजा राम जानकी वल्लभ राजा राम राम सिया राम सिया राम सिया सिया राम सिया राम सिया राम सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी सावन की झड़ी प्यासे प्राणों पे पड़ी सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी राम लखन अनमोल नगीने अवध अंगूठी में जड़ दीन्हे सीता ऐसी सोहे जैसे मोती की लड़ी सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी राम सिया को रूप निहारे नाचे गावे सब नर नारी चल री दर्शन कर आवे क्या सोचत कड़ी सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी रोम को रोम को नयन बना लो राम सिया के दर्शन पा लो बरसो पीछे आयी है ये मिलन की घड़ी सीता राम दरस रस बरसे जैसे सावन की झड़ी

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Category
ram
Type
bhajan
Published
21 जून 2026
Tags
ram bhajan

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