!doctype html> Stotraतन्त्र शान्ति स्तोत्र (Tantra Shanti) Lyrics — Vrinda Ke Geet
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Krishna स्तोत्रम्

Stotraतन्त्र शान्ति स्तोत्र

Tantra Shanti

Published: 21 जून 2026

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Tantra Shanti Stotra

तन्त्र शान्ति स्तोत्र

तन्त्र शान्ति स्तोत्र (Tantra Shanti Stotra):

समस्त प्रकार के तंत्र दोषों को दूर करने का मंत्र… इस विघ्न-विनाशक तन्त्र शान्ति मंत्र के पाठ मात्र से भयानक से भयानक तान्त्रिक प्रयोग नष्ट हो जाता है ।

तन्त्र शान्ति स्तोत्र पाठ कैसे करे?

किसी भी शुक्रवार शाम के समय 5 से 9 के बीच या फिर किसी भी रविवार को सुबह 7 से 11 बजे के बीच लाल ऊनि आसन पर बैठ कर या खड़े होकर इस तन्त्र शान्ति मंत्र को 3 बार बोल कर 21 पढना चाहियें.. इसके पाठ मात्र से ही.. सभी विघ्न और तंत्र दोष नष्ट होकर घर की शान्ति हो जाती है ।

घर, दुकान और ऑफिस पर ऐसा प्रयोग दुबारा न हो.. रक्षा रहे इसके लिए… घर, दुकान ऑफिस की चौकट पर.. सिद्ध फेत्कारिणी गुटिका लाल कपडें में बांधकर किसी भी मंगलवार लगा दे।

तन्त्र शान्ति

स्तोत्र हिंदी पाठ

Tantra Shanti Stotra in Hindi

नश्यन्तु प्रेतकुष्माण्डा नश्यन्तु दूष का नराः ।

साधकानां शिवाः सन्तु आम्नायपरिपातिनाम् ।। 1 ।।

जयन्ति मातरः सर्वा जयन्ति योगिनीगणाः ।

जयन्ति सिद्धडाकिन्यो जयन्ति गुरुपङ्क्तयः ॥ 2 ॥

जयन्ति साधकाः सर्वे विशुद्धाः साधकाश्च ये ।

जयन्ति पूज समयाचारसम्पन्ना का नराः ॥ 3 ॥

नन्दन्तु चाणिमासिद्धाः नन्दन्तु कुलपालकाः ।

देवताः सर्वे तृप्यन्तु इन्द्राद्या वास्तुदेवताः ॥ 4 ॥

चचन्द्रसूर्यादयो देवास्तृप्यन्तु भक्तितत: ।

मम नक्षत्राणि ग्रहा योगा करणा राशयश्च ये ।। 5 ।।

सर्वे ते सुखिनो यान्तु सर्पा नश्यन्तु पक्षिणः ।

पशवस्तुरगाचैव पर्वताः कन्दरा गुहाः ॥ 6 ॥

ऋषयो ब्राह्मणाः सर्वे शान्ति कुर्वन्तु सर्वदा ।

स्तुता मे विदिताः सन्तु सिद्धास्तिष्ठन्तु पूजकाः ॥ 7 ॥

ये ये पापधियस्सुदूषणरता मन्निन्दकाः पूजने ।

वेदाचारविमर्दनेष्टहृदया भ्रष्टष्य ये साधकाः ॥

दृष्टवा चक्रमपूर्वमन्दहृदया ये कोलिका दूषकास्ते ।

ते यान्तु विनाशमत्र समय श्री भैरवस्याज्ञया ।। 8 ।।

द्वेष्टारः साधकानां सदैवाम्नायदूषकाः ।

डाकिनीनां मुखे यान्तु तृप्तास्तत्पिशितैः स्तुताः ।। 9 ।।

ये वा शक्तिपरायणा: शिवपरा ये वैष्णवाः साधवः ।

सर्वस्मादखिले सुराधिपमजं सेव्यं सुरेः सन्ततम् ॥ 10 ॥

शक्तिं विष्णुधिया शिवं च सुधिया श्री कृष्णबुद्धया च ये ।

सेवन्ते त्रिपुरं त्वभेदमतयो गच्छन्तु मोक्षन्तु ते ॥ 11 ॥

शत्रवो नाशमायान्तु मम निन्दाकरच ये ।

द्वेष्टारः साधकानां च ते नश्यन्तु शिवाज्ञया ॥ 12 ॥

ततः परं पठेत स्तोत्रमानन्दस्तोत्रमुत्तमम् ॥

॥ इति तन्त्र शान्ति स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Song Details

Category
krishna
Type
strotram
Published
21 जून 2026
Tags
krishna strotram

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