!doctype html> श्री हनुमान अष्टक (shri hanuman ashatak) Lyrics — Vrinda Ke Geet
shri hanuman ashatak — श्री हनुमान अष्टक devotional song
Hanuman भजन

श्री हनुमान अष्टक

shri hanuman ashatak

Published: 21 जून 2026

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हिंदी

|| श्री हनुमान अष्टक||

बाल समय रवि, भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक, भयो अंधियारों।

ताहि सों त्रास, भयो जग को, यह संकट काहु सो, जात न टारो।

देवन आनि, करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि, कष्ट निवारो।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥१ ॥

बालि की त्रास, कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु, पंथ निहारो।

चौंकि महामुनि, साप दियो तब, चाहिए कौन, बिचार बिचारो।

कै द्विज रूप, लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के, सोक निवारो ।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥२ ॥

अंगद के संग, लेन गए सिय, खोज़ कपीस यह, बैन उचारो।

जीवत ना बचिहौ, हम सो जु, बिना सुधि लाए, इहाँ पगु धारो।

हेरी थके तट, सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि, प्राण उबारो ।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥३ ॥

रावण त्रास, दई सिय को सब, राक्षसी सों कही, सोक निवारो।

ताहि समय, हनुमान महाप्रभु, जाए महा, रजनी चर मारो।

चाहत सीय, असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका, सोक निवारो ।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥४ ॥

बाण लाग्यो उर, लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो।

लै गृह बैद्य, सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु, बीर उपारो।

आनि सजीवन, हाथ दिए तब, लछिमन के तुम, प्राण उबारो ।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥५ ॥

रावण युद्ध, अजान कियो तब, नाग कि फाँस, सबै सिर डारो।

श्री रघुनाथ, समेत सबै दल, मोह भयो यह, संकट भारो I

आनि खगेस, तबै हनुमान जु, बंधन काटि, सुत्रास निवारो ।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥६ ॥

बंधु समेत, जबै अहिरावण, लै रघुनाथ, पताल सिधारो।

देबिन्हीं पूजि, भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि, मन्त्र विचारो।

जाए सहाए, भयो तब ही, अहिरावण सैन्य, समेत संहारो ।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥७ ॥

काज़ किए बड़, देवन के तुम, बीर महाप्रभु, देखि बिचारो।

कौन सो संकट, मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं, जात है टारो।

बेगि हरो, हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट, होए हमारो ।

को नहीं जानत, है जग में कपि, संकट मोचन, नाम तिहारो ॥८ ॥

॥दोहा ॥

लाल देह, लाली लसे, अरु धरि, लाल लंगूर।

वज़्र देह, दानव दलन, जय जय, जय कपि सूर ॥

अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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Category
hanuman
Type
bhajan
Published
21 जून 2026
Tags
hanuman bhajan

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